बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की महिमा अपरमपार है। बाबा की शक्ति, या यूं कह लिजिए की, बाबा का चमत्कार ही भक्तों को हर रोग से मुक्त कर देता है। घर-घर सनातन की अलख जगाने वाले बाबा धीरेद्र कृष्ण शास्त्री के करोडों भक्त, कोई बंगाल तो कोई बिहार, कोई एमपी तो कोई गुजरात से देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा का आर्शिवाद प्राप्त करने के लिये उनके दरबार में पधारते हैं।यही कारण है कि अब, बागेश्वर वाले बाबा यानी धीरेन्द्र शास्त्री देश-विदेश में इतने फेमस हो गये हैं कि लोग टीवी पर उनके दर्शन करते हैं और टीवी पर ही आर्शिवाद लेकर उनकी कथा का श्रवण करते हैं। Bageshwar Baba Dhirendra Krishna Shastri के रहन सहन और शिक्षा के बारे में भी बताते हैं।बागेश्वर धाम पंडित धीरेन्द्र शास्त्री पर्चे पर लिखकर लोगों की समस्या का हल निकालते हैं। ऐसे में लोगों को जिज्ञासा होती है कि वह खुद कितने पढ़े लिखे हैं।पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का नाम आज कल हर इंसान की जुबान पर है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते है...
एक पच्चीस वर्ष का युवा कथावाचक बिहार जैसे राज्य में आता है और दूसरे ही दिन आठ से दस लाख की भीड़ उमड़ पड़ती है, तो यह सिद्ध होता कि अब भी इस देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका धर्म है। मैं यह इसलिए भी कह रहा हूँ कि इसी बिहारभूमि पर किसी बड़े राजनेता की रैली में 50 हजार की भीड़ जुटाने के लिए द्वार द्वार पर गाड़ी भेजते और पैसे बांटते हम सब ने देखा है। वैसे समय में कहीं दूर से आये किसी युवक को देखने के लिए पूरा राज्य दौड़ पड़े, तो आश्चर्य होता है। मेरे लिए यही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Pandit Dhirendra Krishna Shastri) का सबसे बड़ा चमत्कार है।वह दस लाख की भीड़ किसी एक जाति की भीड़ नहीं है, उसमें सभी हैं। बाभन-भुइंहार हैं, तो कोइरी कुर्मी भी.राजपूत हैं तो बनिया भी, यादव भी, हरिजन भी... यह वही बिहार है जहां हर वस्तु को जाति के चश्मे से देखने की ही परम्परा सी बन गयी है। उस टूटे हुए बिहार को एक युवक पहली बार में इतना बांध देता है, तो यह विश्वास दृढ़ होता है कि हमें बांधना असम्भव नहीं। राजनीति हमें कितना भी तोड़े, धर्म हमें जोड़ ही लेगा.आयातित तर्कों के दम पर कितना भी बवंडर बतिया लें, पर यह सत्य है कि इस देश को केवल...
1 जवान बेटे की शहादत , पिता के सीने पर , उस नासूर की तरह चुभ गई .. जिसकी टीस अरसे तक रहेगी ... इस हमले में एक पिता ने सिर्फ आपना बेटा नहीं खोया देश सुरक्षा को लेकर आत्म विश्वास भी खोया है ! कोई भी नहीं समझ पा रहा है , और , न सरकार समझा पा रही है कि , हमारा अगला कदम क्या होना चाहिएइस मातम के बीच आपको क्रांतिधारा मेरठ लेकर चलते हैं ... मादर - ए हिंद की हिफाजत में कुर्बान हुए हैं लालरास्ते में है शहीद का टोला , आखिरी रुखसती के इंतजार में बिलख पड़ा परिवार...इस परिवार के लिए , ठहर गया है जीवन .... ठहर गया है मौसम .... ठहर गई है रुत , और ठहर गया है मातम रह-रह कर गूंजती है , पिछली बाते मोर्चे पर हूं,.. महफूज रखना है वतन को...कहते हैं बाप के लिए जमीन से भी भारी हो जाती जवान बेटे की लाश , .... कोई तो कह दे खबर झूठी है...झूठे हैं ये अखबार , हजारों झूठे शब्दों के बीच इस झूठ की गुजाइंश , क्यों नहीं है क्यों नहीं है ? दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग से आई इस खबर ने शहीद के परिवार को विलाप के अलाप में बदल दिया है...जहां से आती ही सातवें सुर में रुदन की आवाजें , अब केतन शर्मा को ही ले लिजिए....
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